२ आश्विन २०७७, शुक्रबार १३:३५   406 पटक हेरिएको
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२ असोज, काठमाडौं । मातृभूमि है पुकारती !

मातृभूमि है पुकारती, तू सो रहा जवान हैं !

देश के सपुत, जाग होरहा बिहान है !! -२

देश में है त्राही-त्राही, सुनरहा है तू पडा !

दीन कि कराह आह, सुनरहा है तू पडा !! -२

देश मे शोषन-दमन, उठरहा तूफान है !

देश के सपुत, जाग होरहा बिहान है !! -२

मातृभूमि है पुकारती ……………..!!

कौन है जो, दौड-दौड गाँव-गाँव जाएगा !

यिन भ्रष्ट शासकों के चङगुल से देशको बचाएगा !!

तेरे बल पे अब भी देख, देशको गुमान है !

देश के सपूत, जाग होरहा बिहान है !! -२

मातृभूमि है पुकारती …………………!!

करवटें बदल नहि, तू अब तो आँखे खोल दे !

तू निकल और एक बार, जय क्रान्ति बोल दे !!

तेरे दम से यह जमीन और आसमान है !

देश के सपूत, जाग होरहा बिहान है !! -२

मातृभूमि है पुकारती ………………..!!

मुक्ति पथ कि मुसिबतों से कब रुकी जवानीयाँ ?

क्रुर शासकों कि डर से, कब झुकी जवानीयाँ ??

उठ कदम बढा कि, तेरी सांस में तूफान है !

देश के सपूत जाग, होरगा बिहान है !! -२

मातृभूमि है पुकारती ………………. !! -२

श्रीमती नगीना कुमारी झा

राष्ट्रिय अध्यक्ष

जनतान्त्रिक महिला संगठन

सचिवालय सदस्य

राष्ट्रिय जनतान्त्रिक गठबन्धन

एवं

#राष्ट्रबचाउअभियान

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